अम्बेडकरनगर

शबे क़द्र : इबादत, इनाम और दुआओं की रात__मौलाना याक़ूब नईमी*

मो०ज़ाहिद सुहेल संवाददाता -बेनकाब भ्रष्टाचार जहाँगीरगंज अम्बेडकरनगर*

*मो०ज़ाहिद सुहेल संवाददाता -बेनकाब भ्रष्टाचार जहाँगीरगंज अम्बेडकरनगर*

*शबे क़द्र : इबादत, इनाम और दुआओं की रात__मौलाना याक़ूब नईमी*

जहाँगीरगंज अम्बेडकरनगर: रमज़ान मुबारक का तीसरा अशरा ढलान पर है। तीसरे अशरे की 27वीं शब को शब-ए-कद्र के रूप में मनाया जाता है। इसी मुकद्दस रात में कुरआन भी मुकम्मल हुआ। रमज़ान के तीसरे अशरे की पांच पाक रातों में शब-ए-कद्र को तलाश किया जाता है। ये रात हैं 21वीं, 23वीं, 25वीं 27वीं और 29वीं रात। 27वीं इबादत की रात होती है। 27वीं शब को उन अधिकतर मसाजिद में जहां तरवीह की नमाज़ अदा की गई वहां कुरान हाफिजों का सम्मान किया जाता है। साथ ही सभी मस्जिदों में नमाज़ अदा कराने वाले इमाम साहेबान का भी मस्जिद कमेटियों की तरफ से इनाम-इकराम देकर इस्तकबाल किया जाता है।शबे कद्र को रात भर इबादत के बाद मुसलमान अपने वालिदैन और अजी़ज़ो-अक़ारिब की कब्रों पर सुबह-सुबह फातिहा पढ़कर उनकी मगफिरत (मोक्ष) के लिए दुआएं भी मांगते हैं।इस रात में अल्लाह की इबादत करने वाले मोमिन के दर्जे बुलंद होते हैं। गुनाह बक्श दिए जाते हैं। दोज़ख की आग से निजात मिलती है। वैसे तो पूरे माहे रमजान में बरकतों और रहमतों की बारिश होती है। ये अल्लाह की रहमत का ही सिला है कि रमजान में एक नेकी के बदले 70 नेकियां नामे-आमाल में जुड़ जाती हैं, लेकिन शब-ए-कद्र की विशेष रात में इबादत, तिलावत और दुआएं कुबूल व मकबूल होती हैं।अल्लाह तआला की बारगाह में रो-रोकर अपने गुनाहों की माफी तलब करने वालों के गुनाह माफ हो जाते हैं। इस रात खुदा तआला नेक व जायज़ तमन्नाओं को पूरी फरमाता है। रमज़ान की विशेष नमाज़ तरावीह पढ़ाने वाले हाफिज साहबान इसी शब में कुरआन मुकम्मल करते हैं, जो तरावीह की नमाज अदा करने वालों को मुखाग्र सुनाया जाता है। इसके साथ घरों में कुरआन की तिलावत करने वाली मुस्लिम महिलाएं भी कुरआन मुकम्मल करती हैं।रमज़ान का पवित्र महीना अपने आखिरी दौर में पहुंच चुका है। शबे कद्र की रात को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि यह तय नहीं माना जाता कि रमज़ान में शबे कद्र कब होगी, लेकिन 26वां रोज़ा और 27वीं शब को शबे कद्र होने की संभावना जताई जाती है।उक्त बातें अहलेसुन्नत का मरकज़ी एदारह मदरसा जामिया अरबिया इज़हारुल उलूम जहाँगीरगंज के प्रधानाचार्य मौलाना मोहम्मद याक़ूब साहब नईमी ने कही।मौलाना याक़ूब साहब ने कहा कि रमज़ान के पवित्र महीने में ईद से पहले हर व्यक्ति को 2 किलो 47 ग्राम गेहूं या उसकी कीमत के बराबर राशि गरीबों में वितरित करनी होती है। इसे फितरा कहते हैं। हालांकि इस बार फितरे की रक़म 35 रूपया तय पायी गई है फितरा हर पैसे वाले इंसान पर देना वाजिब है। नाबालिग बच्चों की ओर से उनके अभिभावकों को फितरा अदा करना होता है।

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