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राष्ट्रीय महासचिव का जन्मदिन बड़ी धूमधाम से मनाया गया!लोगों ने दी बधाई,शुभकामनाएं व उपहार

कौशाम्बी जनपद के पूरामुफ्ती थाना क्षेत्र में पूरामुफ्ती पब्लिक स्कूल एंड कॉलेज में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए

कौशांबी उ0 प्र0

*राष्ट्रीय महासचिव का जन्मदिन बड़ी धूमधाम से मनाया गया!लोगों ने दी बधाई,शुभकामनाएं व उपहार*

कौशाम्बी जनपद के पूरामुफ्ती थाना क्षेत्र में पूरामुफ्ती पब्लिक स्कूल एंड कॉलेज में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए राष्ट्रीय सनातन सेना के राष्ट्रीय महासचिव डॉ प्रभुशंकर शुक्ला का जन्मदिन बड़ी धूम-धाम से मनाया गया, उपस्थित लोगों ने बधाई ,शुभकामनाओं के साथ साथ उपहार भी दिये।
आपको बता दें कि पूरामुफ्ती पब्लिक स्कूल एण्ड कॉलेज के प्रबंधक व राष्ट्रीय सनातन सेना के राष्ट्रीय महासचिव का 54 वां जन्मदिन बड़ी धूम-धाम से मनाया गया, इस मौके पर राष्ट्रीय सनातन सेना के पदाधिकारीगण एवं कालेज के स्टाफगण मौजूद रहे, इस अवसर पर डॉ शुक्ला ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मनुष्य जन्म भगवान् का सबसे बड़ा उपहार है, सृष्टि में लाखों-करोड़ों योनियां हैं ,धरती पर रहने वाले, आकाश में उड़ने वाले, और जल में निवास करने वाले, अगणित प्रकार के पशु पक्षी कीट पतंग जीव जंतु इस संसार में रहते हैं उनमें से किसी को भी वे सुविधायें नहीं मिली जो मानव प्राणी को प्राप्त है,व्यवस्थित रीति से बोलने और सुसंगत रूप से सोचने की क्षमता मनुष्य के अतिरिक्त और किसी को नहीं मिली है, शरीर यात्रा की समस्या को सुलझाने में ही अन्य प्राणी अपना समस्त जीवन व्यतीत करते हैं, फिर भी आहार, निवास एवं सुरक्षा की उलझने बनी रहती हैं, अपने समाज में पारस्परिक सहयोग से भी उन्हें वंचित रहना पड़ता है, अनेक प्रकार की जो सुविधा सामग्री मनुष्य को प्राप्त है वह उन बेचारों के भाग्य में कहां है, बुद्धि का विकास न होने से विचारणा एवं भावना क्षेत्र में मिल सकने वाले उल्लास आनंदो से तो एक प्रकार से वंचित ही हैं, उनकी तुलना में मनुष्य कितना अधिक सुखी और साधन संपन्न है, इस पर बारीकी से विचार किया जाए तो यही प्रतीत होता है कि भगवान ने हमें सृष्टि का सर्वोच्च प्राणी बनाया है, और सर्वोपरि साधन सुविधाएं प्रदान की हैं।अगली कड़ी में डा0 शुक्ला ने सनातन धर्म की शुरुआत कब हुई इसके बारे में भी लोगों को विस्तार पूर्वक जानकारी दी,उन्होंने बताया,हिंदू धर्म को सनातन, वैदिक या आर्य धर्म भी कहते हैं, हिंदू और जैन धर्म की उत्पत्ति पूर्व आर्यों की अवधारणा में है, जो 4500 ई0.पू0.मध्य एशिया से हिमालय तक फैले थे, आर्यों की ही एक शाखा ने पारसी धर्म की स्थापना भी की, इसके बाद क्रमशः यहूदी धर्म दो हजार ई0.पू0, बौद्ध धर्म पाँच सौ ई0.पू0., ईसाई धर्म सिर्फ़ दो हजार वर्ष पूर्व ,इस्लाम धर्म आज से चौदह सौ वर्ष पूर्व हुआ, हिन्दू एक अप्रभ्रंश शब्द है, हिन्दुत्व या हिन्दू धर्म को प्राचीनकाल में सनातन धर्म कहा जाता था, “हिन्दू” शब्द “सिन्धु” से बना माना जाता है। संस्कृत में सिन्धु शब्द के दो मुख्य अर्थ हैं, पहला सिन्धु नदी जो मानसरोवर के पास से निकलकर लद्दाख और पाकिस्तान से बहती हुई, समुद्र में मिलती है,दूसरा कोई समुद्र या जलराशि एक हजार वर्ष पूर्व हिन्दू शब्द का प्रचलन नहीं था, ऋग्वेद में कई बार सप्त सिंधु का उल्लेख मिलता है, ऋग्वेद की नदी स्तुति के अनुसार वे सात नदियां थी, सिन्धु सरस्वती, वितस्ता(झेलम)शुतुद्रि (सतलुज)विपाशा(व्यास)परुषिणी (रावी)और अस्किनी (चेनाब)एक अन्य विचार के अनुसार हिमालय के प्रथम अक्षर “हि” एवं हिन्दू का अंतिम अक्षर “न्दु” इन दोनों अक्षरों को मिलाकर शब्द बना हिन्दू और यह भूभाग हिन्दुस्तान कहलाया, सिन्धु शब्द का अर्थ नदी या जलराशि होता है, इसी आधार पर एक नदी का नाम सिंधु नदी रखा गया, जो लद्दाख और पाक से बहती है, हिन्दू शब्द उस समय धर्म के बजाय राष्ट्रीयता के रूप में प्रयुक्त होता था,चूंकि उस समय भारत में केवल वैदिक धर्म को ही मानने वाले लोग थे, बल्कि तब तक अन्य किसी धर्म का उदय नहीं हुआ था, इसलिए “हिन्दू” शब्द सभी भारतीयों के लिए प्रयुक्त होता था, भारत में केवल वैदिक धर्मावलम्बियों (हिन्दुओं) के बसने के कारण कालान्तर में विदेशियों ने इस शब्द को धर्म के संदर्भ में प्रयोग करना शुरू कर दिया, हिन्दू धर्म का इतिहास अति प्राचीन है, इस धर्म को वेदकाल से भी पूर्व का माना जाता था, क्योंकि वैदिक काल और वेदों की रचना का काल अलग-अलग माना जाता है, यहां शताब्दियों से मौखिक परंपरा चलती रही, जिसके द्वारा इसका इतिहास व ग्रंथ आगे बढ़ते रहे, भाषाविदों का मानना है कि हिन्द -आर्य भाषाओं को ‘स’ ध्वनि इरानी भाषाओं का ‘ह’ ध्वनि में बदल जाती है, आमतौर पर हिन्दू शब्द को अनेक विश्लेष्कों द्वारा, विदेशियों द्वारा दिया गया शब्द माना जाता है,इस धारणा के अनुसार हिन्दू एक फ़ारसी शब्द है, हिन्दू धर्म को सनातन धर्म या वैदिक धर्म भी कहा जाता है। इन्हीं शब्दों के साथ डाॅ शुक्ला ने उपस्थित लोगों का आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद दिये। डाॅ शुक्ला के जन्म दिन के अवसर पर मुख्य रूप से राष्ट्रीय सनातन सेना के कानून मंत्री श्री विष्णु पांडेय, महिला प्रकोष्ठ की महासचिव डाॅ श्वेता पाठक, सनातन सेना के जिलाध्यक्ष अशोक मिश्र राजेन्द्र तिवारी एंव अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

*रिपोर्ट:राजेश कुमार बेनकाब भष्ट्राचार समाचार पत्र एंव वेब न्यूज चैनल कौशाम्बी*

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