लखीमपुर खीरी

रंग में भंग होली…………………

लेखक-रमेश कुमार

*रंग में भंग होली…………………*

आज फागुन माह की पूर्णिमा तिथि थी। सायं बीत चुकी थी, राज पूरे गाॅव में आवाज लगाकर होली जलने की सूचना दे रहा था। सारे लोग अपने-2 घरों से निकल कर कण्डे, गेंहूॅ, अलसी, जौ की बालियाॅ लिए बड़े उल्लास के साथ आगे बढ़ रहे थे। उनमें नौजवान, बच्चे, बूढे, पुरुष, महिला सभी शामिल थे, परन्तु टोलियाॅ अलग-अलग थी। पुरुष कतारों में बच्चों के साथ अलग चल रहे थे, और महिलाएं अलग। आज बसंत पंचमी को व्यतीत हुए 40 दिन से अधिक हो गया था। होलिका लकड़ी, कण्डे, पुआल आदि से पूरी तरह से सजी हुई थी। सारे लोग होलिका दहन को देखने के लिए एकत्र हो चुके थे।
होलिका पर एकत्र सभी लोग मस्ती कर रहे थे, हंसी मंजाक चल रहा था। वहां ग्रामवासियों के साथ-साथ मेहमानगण भी एकत्र थे। कुछ शरारती रंग की पुड़िया खोलकर चुपके से बालों में सूखा रंग डाल दे रहे थे, तो कुछ पटाखे होलिका में ही डाल दे रहे थे। वहां रवाइस मस्ताब जल रही थी, उजाला ही उजाला था। समयानुसार राज ने होलिका में आग लगा दी। सारे लोग देख रहे थे, एक दूसरे को कुछ न कुछ किस्सा कहानी सुना रहे थे। आग अपना प्रचंड रुप धारण कर चुकी थी, अब मौसम में आर्दता होने के बावजूद भी कोई भी आस-पास में टिक नही पा रहा था। लपटें आसमान की ओर तेजी से उठ रही थी। कुछ देर बाद धीमे-2 आग शान्त होना प्रारम्भ हो चुकी थी।
अब राज की बारी थी, वह पास के घर से नल से बाल्टियाॅ भर-भर कर पानी ला रहा था। एक किनारे से पानी डाल रहा था, और प्रहलाद का स्वरुप अरण्डी के पेड़ तक पहुॅचने का प्रयत्न कर रहा था। काफी देर हो चुकी थी, पानी भरकर लाते आग के करीब जाने से वह पसीने से तर-बतर हो चुका था, परन्तु उसका वास्तविक इम्तिहान बाकी था। अब लगभग आग की लपटें शान्त हो चुकी थी, थोड़ी बहुत ही लपटें बची थी। लोग अपने साथ लाए अलसी, गेंहू, जौ की बालियों में से कुछ होलिका में डाल रहे थे, कुछ बची बालियों को भून रहे थे। कुछ जागरुक लोग होलिका में ईलाइची और कपूर फेंक रहे थे, उनका मानना था कि इससे वातावरण में प्रतिरोधक्ता बढ़ती है, पर्यावरण शुद्ध होता है।
राज ने एक किनारे से आग डण्डे से हटा-हटा कर पानी डाल-डाल कर अरण्डी के पेड़ तक पहुॅचने का मार्ग बना लिया था। अब वह अरण्डी के पेड़ को हिला रहा था, क्योंकि आग के ताप के कारण बैठकर मिटटी खोद पाना तो अत्यंत कठिन था। इसलिए वह पानी डाल-डालकर हिल्लाए जा रहा था। राज पेड़ को कई बार उखाड़ने का प्रयत्न कर चुका था, परन्तु पेड़ था कि उखड़ने का नाम ही नही ले रहा था, परन्तु आश्चर्यजनक राज की ऊर्जा में बिल्कुल भी कमी नही आई थी। बल्कि लोगों के हंसने मजाक बनाने की वजह से उसकी तल्लीनता और बढ़ती जा रही थी। आखिर बार-बार के प्रयास के चलते पेड़ उखड़ गया था, शायद पेड़ की जड़ में लगी होल फांस जो पेड़ को जमीन में गाड़ते वक्त बच्चों ने लगाई थी, वह छूट गई थी. वह हिस्सा टूट गया था।
खैर लोग जयकारे लगा रहे थे, कुछ लोग राज की प्रशंसा भी कर रहे थे, बच्चे जिन्होंने पेड़ रोपित किया था, वह मन ही मन अफसोस कर रहे थे कि इतना अच्छे से गड़ाने के बावजूद कैसे पेड़ उखड़ गया। खैर कोई बात नही अगली बार बताएंगे। अब सारे लोगों ने होलिका और प्रहलाद की प्रदक्षिणा की और थोड़ी-थोड़ी आग लेकर अपने-अपने घरों की ओर चल दिए। रास्ते में कई जगह मठिया आदि पर आग रखी और अपने-अपने घरों में आ गए।
अगली सुबह सब अपने-अपने घरों से निकलकर एक जगह एकत्र हो रहे थे, एक छुटभैया ने बैण्ड बुला लिया था। कुछ बच्चे उस पर थिरक रहे थे। कुछ बच्चे अपने-अपने हांथों में पिचकारी लिए हुए थे, रंग एक दूसरे पर भाग-भाग कर डाल रहे थे। कुछ एक दूसरे पर ठप्पा लगा रहे थे। तभी एक बच्चे पर नजर गई तो वह गुब्बारे में रंग भरे हुए था। उसके पास कई गुब्बारे जेब में थे। वह जेब से गुब्बारा निकालता और फेंक कर बच्चों पर, दीवाल पर मारता, जिससे गुब्बारा फूट जाता और रंग लग जाता। कुछ बड़े लोग गुलाल लिए हुए थे। वह एक दूसरे को जमकर लगा रहे थे। कोई यह नही देख रहा था कि अभी धूप निकली है या नहीं। कोई छोटा है या बड़ा. सब सुरु हो गए थे। कुछ बड़े लोग एक दूसरे को गुलाल लगाने के बाद पैर छूकर आशीर्वाद ले रहे थे. गले मिल रहे थे. कुछ बच्चे भी उन्हें देखकर कापी कर रहे थे.
बैण्ड चल चुका था, छुटभैया आगे-आगे उनके पीछे बैण्ड। इस जत्थे में प्रमोद भी शामिल था। उसे रंग लगाना, लगवाना बिल्कुल पसंद नही था। वह न खुद रंग लगा रहा था, और न लगवा रहा था। कुछ बच्चे उससे जबरदस्ती कर रहे थे। वह समझा रहा था भैया यह सब रंग क्रत्रिम है, रसायनयुक्त है, इसके लगने से त्वचा खराब हो जाएगी। इसे मत खेलो, परन्तु होली की धुन में सवार लोगों को कहां समझ में आ रहा था। प्रमोद केवल गुलाल खेल रहा था। उसका गुलाल भी काफी अच्छा लग रहा था। उसका गुलाल सिर नही पकड़ रहा था। लोग घर-घर जाकर एक दूसरे को गुलाल लगा रहे थे, बच्चे रंग डाल रहे थे। बैण्ड और जत्था जिस घर जाता। हर घर में जत्थे के खाने पीने के लिए कुछ न कुछ व्यवस्था जरुर होती।
लोग कचैड़ियाॅ, गुझियाॅ, पकौड़िया, आदि बांट रहे थे, तो कुछ लोगों ने भांग व शराब की भी व्यवस्था की हुई थी। कुछ लोग तो खाने और पीने से मना कर रहे थे, अपना पिंड छुड़ा रहे थे, तो कुछ लोग तो शायद इसीलिए खाने और पीने के लिए ही जत्थे का साथ निभा रहे थे। जत्था जहां भी जिसके घर पहुॅचता, ऐसे लोग पहले ही टूट पड़ते, और सबसे ज्यादा नजर शराब पर रहती। इस सबमें सबसे ज्यादा खराब लगने लायक बात यह थी कि कुछ बच्चे भी नसे में लग रहे थे। यह प्रमोद को बिल्कुल भी पसंद नही आ रहा था, परन्तु क्या करता? आज तो कोई सुनने मानने को तैयार नही था।
इसी तरह से कारवां बढ़ रहा था तभी, एक किशोर आकाश जो बहुत शरारती था, वह जत्थे में शामिल हो गया। लड़के उससे अपना पीछा छुड़ा रहे थे, परन्तु वह था कि पीछा छोड़ने का नाम ही नही ले रहा था। उसने भी शायद शराब पी रखी थी। वह छोटे-छोटे बच्चों से उनका रंग छीन-छीनकर डाल रहा था। कुछ बड़े लोग भी उसे देखकर समझाने का प्रयत्न कर रहे थे, परन्तु वह कहाॅ मानने वाला था। वह अपनी जेबों में कई हरे रंग के डिब्बे रखे हुए था। मौका देखते ही वह किसी का भी बर्तन छीन लेता और रंग घोल लेता और लोगों पर डाल देता। आज होली का त्योहार था, कोई किसी को दुखी नही करना चाहता था। शायद इसीलिए सारे लोग आकाश को अब तक छोड़़े हुए थे। अन्यथा अबतक उसका पिट जाना तय था।
तभी आकाश की नजर कुछ बच्चों पर गई जो, गुब्बारे में रंग भरकर खेल रहे थे। यह विचार उसे भा गया था। उसने कई बच्चों से गुब्बारे छीन लिए थे, और एक पैकेट उसने खुद दुकान से खरीद भी लिया था। अभी तक वह रंग लोगों पर डाल रहा था, और अपने हांथों से लोगों, बच्चों के चेहरों पर हरा रंग लगा-लगाकर तीन चैथाई लोगों को बदसूरत बना चुका था। कुछ ही लोग बचे थे, जिन पर अभी वह हिम्मत नही जुटा पाया था। क्योंकि उन लोगों ने उसे झिड़क दिया था। उसके दोनों हांथ रंग से काले हो गए थे. वह खुद भी बदसूरत लग रहा था, क्योंकि कुछ लड़कों ने मिलकर उसे रंग दिया था. अब तो हद हो गई थी उसने गुब्बारों में भरे हुए रंग लोगों पर फेंक-फेंक कर मारना प्रारम्भ कर दिया था। कई लड़कों को चोंटे भी आई थी, लोग उसे बार-बार हिदायत दे रहे थे। वह कुछ देर चुप हो जाता, और कुछ देर बाद फिर शुरु कर देता। शैतानी तो जैसे आकाश के अंग-अंग में भरी हुई थी।
तभी आकाश ने प्रमोद को थोड़ा ठीक देखा, प्रमोद के थोड़ा रंग और गुलाल कम लगा हुआ था। उसने एक छोटे गुब्बारे में आठ-दस हरे रंग की पुड़िया डाली। वह रंग कम और कालिख ज्यादा लग रही थी, इतना गाढ़ा था रंग। उसने प्रमोद के ऊपर दे मारा, परन्तु यह क्या? रंग प्रमोद के शरीर पर लगने की बजाए सीधे मस्तक के निचले हिस्से से टकराकर टूट गया था। काफी रंग उसकी आंख में चला गया था। प्रमोद के सामने तो अंधेरा छा गयाा था, वह बुरी तरह से कराहने लगा। सारे लोग सब छोड़-छोड़कर प्रमोद की ओर भागे। उसकी आॅख में बुरी तरह से रंग भरा हुआ था। लोग फटाफट पानी ले आए थ। धुलाने का प्रयत्न कर रहे थे, परन्तु कोई फायदा नही हो रहा था। आकाश का तो मानो खून सूख गया हो।
कुछ लोग आकाश की तरफ दौड़े। कुछ लोगों ने उसे कई थप्पड़ भी जड़ दिए, परन्तु क्या फायदा था। यह काम थोड़ा पहले कर देना चाहिए था। अबतक उत्सव मातम में बदल गया था। बैण्ड बंद हो गया था। प्रमोद के घर वालों को पता लगते ही वह सब दौड़े-दौड़े आ गए थे। पूरे परिवार के लोग चीख रहे थे। प्रमोद को अस्पताल ले जाया जा रहा था। कुछ लोग कह रहे थे आकाश को पेड़ में बांध धो। इसकी धुलाई करते हैं, तो कुछ लोग कह रहे थे कि इसकी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई जाए। आकाश सबके पैरों पर गिरकर गिड़गिड़ा रहा था, माफी मांग रहा था, उसकी सारी शराब उतर चुकी थी। परन्तु अब क्या फायदा अब तो रंग में भंग पड़ ही चुकी थी।
सारे लोगों को होली भूल चुकी थी, सब प्रमोद के लिए प्रार्थना कर रहे थे। एक पेड़ के नीचे बैठे पश्चाताप कर रहे थे। कई गाडियाॅ प्रमोद के साथ गई थी। आकाश रोए जा रहा था। दो घण्टे बाद खबर मिली। कि प्रमोद अस्पताल में भर्ती हो गया है, होली की वजह से बड़ी मुश्किल से डाक्टर मिल पाए है, परन्तु आॅख का इतनी जल्दी ठीक होना नामुमकिन है। उसे ठीक होने में अभी कई महिने लगेंगे। लोग मुंह लटकाए अपने-अपने घर को जा रहे थे, और जा रहा था रोते हुए आकाश भी।
………………………………..
*विनम्र अपील*: इस बार होली में रंग के बजाए अच्छे गुलाल का प्रयोग करें। पानी और रंग का प्रयोग कदापि न करें। स्वयं संक्रमण से बचें, और दूसरों को भी बचाएं। बच्चे बड़ों की देखा-देखी करते हैं, इसलिए उनके सामने धूम्रपान शराब भांग का शेवन करने से बचें.
………………………………..
रमेश कुमार, लेखक वन एवं वन्य जीव प्रेमी
दुधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग, पलिया-खीरी।
मोबाइल नं0-9721827457
ईमेल- ramesh112.palia@gmail.com

बेनकाब भ्रष्टाचार

Related Articles

Back to top button