लखीमपुर खीरी

बिन मौसम अलबेली वर्षा आई है, मन में चिंता गहराई है।

संवाददाता- रिजवान अली

बिन मौसम अलबेली वर्षा आई है, मन में चिंता गहराई है।
बिन सरसों न थाल सजे, उसको भी बर्बाद कर गई।
चना शक्ति का पोषक है, जिसको भी है साथ ले गई।
बिन मसूर न दाल गले, उसके भी है प्राण ले गई।
मटर फली जाड़े की रानी, फली उसकी बेकार हो गई।
यह कैसी बिपदा आई है, संग अपने आफत लाई है।
बिन मौसम अलबेली वर्षा……….

गन्ना यूपी की खान है, उसकी भी फसलें पलट गई।
गोभी लगे सुहानी है, वह भी खासम खास हो गई।
टमाटर लगे सुहाने हैं, पौध उसकी बेकार हो रही।
गाजर मूली सबको प्यारी है, खेती इसकी पानी से भर गई।
आलू सब्जियों का राजा है, खेतों में इसकी फसल सड़ रही।
बिन मांगे वर्षा आई है, संग आफत की पुड़िया लाई है।
बिन मौसम अलबेली वर्षा……..

बढ़ रही दरें हैं ईंधन की, अब सब्जी भी बेकार हो गई।
खादों की आफत थी, अब फसलें भी मझधार में हो गई।
बिन प्याज सूनी थाली गरीब की सब्जी भी जैसे स्वर्ण हो गई।
देख उदासी किसानों की धरती जैसे निष्प्राण हो गई।
जाड़ा प्रकृति थी इस मोसम की यह कैसी तासीर हो गई।
पहले से महंगाई छाई है, वर्षा आफत लाई है।
बिन मौसम अलबेली वर्षा……..

✍✍ रमेश कुमार लेखक वन्य जीव दुधवा टाइगर रिजर्व✍✍

बेनकाब भ्रष्टाचार

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