लखीमपुर खीरी

अधिशासी अधिकारी की नियुक्ति न होने से आई विकास कार्य में बाधा

संवाददाता रिजवान अली

सिंगाही खीरी। ये लो भाई, यहां तो कोई ‘साहब’ ही नहीं है। ‘यहां तो साहब’ भी नहीं मिलते, ऐसे में जाएं तो जाएं कहां? जी हां, ऐसा ही कुछ हाल है सिंगाही नगर पंचायत का, जहां न तो कोई अधिकारी है और बाबू भी लापता रहते हैं। पंचायत अध्यक्ष तो पहले ही नहीं मिलते थे, ईओ वापस ग्राम विकास विभाग चले गए।ऐसे में कहना गलत न होगा कि ईओ की गैरमौजूदगी में नगर पंचायत विकास कार्यों को तरस रहा है।  ऐसे में यहां अपनी शिकायतें लेकर आने वाले लोग परेशान इधर-उधर भटक रहे हैँ। उनकी सुनने वाला कोई नहीं मिल रहा है।
सिंगाही नगर पंचायत की हालत किसी से छिपी नहीं हैं। यहां के लोग गंदगी, अव्यवस्था, जलभराव अलाव जल निकासी, निर्माण सम्बन्धी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन नगर पंचायत को तो इससे मानो कोई सरोकार ही नहीं है। बरसात के इस मौसम में जरा सी बारिश में नगर की सड़कें तालाब जैसी बन जाती हैं, जिससे लोग कई-कई घंटे तक एक ही जगह पर कैद होकर रह जाते हैं। नालों की सफाई ढंग से न हो पाने के कारण ऐसा होता है, जबकि नगर पंचायत द्वारा नालों की तलीझाड़ सफाई का दावा किया जाता है। वास्तविकता यह है कि नालों की सफाई के नाम पर प्रतिवर्ष लाखों रुपये का गोलमाल नगर पंचायत द्वारा कर लिया जाता है। इस समय तो स्थिति और भी ज्यादा बदतर हो चुकी है। नगर पंचायत की हालत लावारिस जैसे हो गई है। अधिशासी अधिकारी अनुराग पांडे ग्रह जनपद के तथ्य छुपाने को लेकर शासन कार्यवाही करते हुए उनको 9 दिसम्बर को वापस ग्राम विकास विभाग कर दिया था।इसके बाद नगर पंचायत में नए ईओ की नियुक्ति नहीं हो पाई और ईओ की कुर्सी खाली रह गई। इस वजह से नगर पंचायत में विकास कार्य पर बुरा असर पड़ने लगा। लोगों का कहना है कि ईओ की कुर्सी खाली रहने से नगर पंचायत के विकास पर बुरा असर पड़ रहा है। अधिकारियों व पंचायत अध्यक्ष की अनुपस्थिति का फायदा कर्मचारी भी उठा रहे हैं। उनके आने-जाने के समय पर कोई पाबंदी नहीं है, जिससे फरियादियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फरियादी यहां आते हैं और भटकते रहते हैं जिससे नगर के लोगों में रोष व्याप्त है। पिछले करीब दो सप्ताह से नगर पंचायत के सभी कामकाज ठप पड़े हैं। न तो कोई नया काम हो रहा है और न ही लोगों की समस्याओं का समाधान हो पा रहा है।इसके चलते नगर पंचायत के लोग खासा परेशान हो उठे हैं। लोगों का कहना है कि ईओ की कुर्सी खाली रहने से नगर पंचायत के विकास पर बुरा असर पड़ रहा है।

बेनकाब भ्रष्टाचार

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