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सिंघाही खीरी :- पानी को समस्या को देखते हुए पानी का कारोबार बढ़ता जा रहा है लेकिन इन पानी के ठेकेदारों के पानी की गुडवत्ता चेक करने वाला कोई नही है ।

रिपोर्ट रिजवान अली

संवाददाता। रिजवान अली

सिंगाही खीरी

सिंगाही खीरी। यहां पानी का धंधा तेजी से परवान चढ़ता रहा है। शुद्ध पेयजल के नाम पर पानी का कारोबार बढ़ता जा रहा है। इन प्लाटों से जार में दुकानों से लेकर निजी प्रतिष्ठानों में पानी पहुंचाया जा रहा है। लेकिन इस पानी की शुद्धता जांचने परखने वाला कोई नहीं है। स्वच्छ पानी के नाम पर यह कारोबार जिस गति से बढ़ता जा रहा है, उसी के अनुपात में पानी बर्बाद हो रहा है। जिससे भू गर्भ जलस्तर पर भी असर पड़ने लगा है। बरसात न होने और गर्मी की धमक के साथ ही पानी की मांग भी बढ़ने लगी है। इसके बाद भी चल रहे शुद्ध पानी के इस कारोबार के प्रति नगर पंचायत से लेकर प्रशासन भी उदासीन बनी हुई हैं।
पिछले कुछ सालों में पानी की शुद्धता को लेकर लोगों में जागरुकता बढ़ी है। पानी जनित बीमारियों के मामले हर साल बढ़ते जाने के कारण शुद्ध पानी की मांग भी बढ़ने लगी है। अपने अपने घरों में लोग आरओ लगा रहे हैं। दुकानों व निजी प्रतिष्ठानों में जार से सप्लाई की जाने वाली शुद्ध पानी की मांग बढ़ी है। इसी के साथ ही पानी का कारोबार भी बढ़ता जा रहा है। हालांकि पानी का कारोबार बढ़ने की कीमत भी लोगों को चुकानी पड़ रही है। एक तो लोग पानी के लिए पैसा चुका रहे हैं। ऊपर से जार में सप्लाई किए जाने वाले पानी की शुद्धता को जांचने परखने वाला कोई नहीं है।
*कारोबार बढ़ने के साथ बढ़ रही पानी की बर्बादी*
आरओ वॉटर प्लांट लगाकर पानी की सप्लाई जिस तेज से पिछले कुछ सालों में बढ़ी है, उसकी के अनुपात में पानी की बर्बादी भी बढ़ती जा रही है। जानकार बताते हैं कि आरओ प्लांट में पानी शुद्ध करने के लिए ऑस्मोसिस प्रॉसेस अपनाई जाती है। इस प्रक्रिया में सौ लीटर पानी में सिर्फ 40 लीटर पानी की शुद्ध होता है। जबकि शेष 60 प्रतिशत पानी बर्बाद हो जाता है। अगर क्षेत्र में प्रतिदिन हजारों लीटर पानी की सप्लाई की जाती है तो इतना की पानी बर्बाद हो जाता है। जिसका असर भू गर्भ जलस्तर पर पड़ रहा है। वे कहते हैं कि आरओ प्लांट में पानी की बर्बादी रोकी जा सकती है। जो पानी बर्बाद हो रहा है उसे किसी जगह इकट्ठा कर री-साइकिल किया जा सकता है। री साइकिल से पानी की बर्बाद रोकी जा सकती है। लेकिन री साइकिल की बात कौन कहे, यहां तो बिना लाइसेंस के ही आरओ वॉटर प्लांट चल रहे हैं।
*बिना लाइसेंस के चल रहे आरओ प्लांट*
तहसील में बिना लाइसेंस के ही अधिकांश आरओ वॉटर प्लांट चल रहे हैं। लाइसेंस नहीं लगने के कारण इन प्लांटों में पानी की शुद्धता की जांच परख भी नहीं होती है। गैर सरकारी आंकड़े बताते हैं कि तहसील क्षेत्र में सिंगाही, निघासन, बेलरायां, तिकुनिया, रकेहती, बम्हनपुर में करीब दस आरओ वॉटर प्लांट हैं। पिछले तीन चार साल के अंदर हर साल आरओ वॉटर प्लांट की संख्या बढ़ती जा रही है। पानी का कारोबार दिनदुना बढ़ रहा है।
*होगी शुद्धता की जांच*
बिना लाइसेंस के चल रहे आरओ वॉटर प्लांट का पता लगाकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह भी जांच जाएगा कि वहां शुद्ध किए जाने वाले पानी की गुणवत्ता मानक के अनुसार है कि नहीं
डॉ विवेक वर्मा
खाद्य सुरक्षा अधिकारी

बेनकाब भ्रष्टाचार

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