सिंगाही खीरी

सिंगाही खीरी :- प्रशासन की सख्ती के बावजूद दुधवा के जंगल से कटरुआ धड़ल्ले से बाहर आ रहा है।

संवाददाता रिजवान अली की रिपोर्ट ।

 

सिंगाही खीरी। प्रशासन की सख्ती के बावजूद दुधवा के जंगल से कटरुआ धड़ल्ले से बाहर आ रहा है। यह धंधा वन कर्मचारियों की मिलीभगत से फलफूल रहा है, जिस पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। बाजार में दो सौ रुपये लेकर तीन सौ रुपये प्रति किलो के भाव से कटरुआ की बिक्री की जा रही है।
बरसात शुरू होते ही जंगल में साल के पेड़ों की जड़ों में कटरुआ मिलने लगता है। कटरुआ की सब्जी सबसे ज्यादा स्वादिष्ट होती है। जंगल किनारे गांवों के लोग वन कर्मचारियों की मिलीभगत से कटरुआ बीनने के लिए चले जाते हैं। तराई क्षेत्र के जंगल में पाए जाने वाले साल पेड़ की जड़ों में कटरुआ मिलता है। अगर जोरदार बारिश हो गई, तो अगले दिन पेड़ों की जड़ों के आसपास खोदने पर कटरुआ मिल जाएंगे। दुधवा के जंगल में कड़ी चौकसी है। प्रत्येक इंट्री प्वाइंट पर बैरियर लगा हुआ है। इसके बावजूद कोर जोन एरिया में जाकर लोग जमीन से कटरुआ निकाल रहे हैं, जो बाजार में दो सौ तीन सौ रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिक रहे हैं। वन कर्मचारियों के सहयोग से लोग कटरुआ निकालने का काम धड़ल्ले से कर रहे हैं। वन कर्मचारी प्रति किलो के हिसाब से सुविधा शुल्क लेते हैं, क्योंकि कटरुआ का प्रति किलो भाव काफी अधिक रहता है। लोग टाइगर के रहने के स्थान तक कटरुआ खोदने वाले पहुंच रहे हैं। अगर समय से अवैध घुसने वाले लोगों पर पाबंदी नहीं लगाई गई, तो किसी भी वक्त बाघ का हमला हो सकता है। प्रत्येक बोरी पर वन कर्मचारी निर्धारित शुल्क वसूल रहे हैं। इस दिशा में टाइगर रिजर्व प्रशासन को कड़े कदम उठाने होंगे। कई दुकानदार कटरुआ की बिक्री कर रहे हैं। स्पष्ट होता है कि जंगल के अंदर कटरुआ बीनने के लिए लोगों का जाना अनवरत जारी है। इस पर कोई अंकुश नहीं लग पा रहा है।

बेनकाब भ्रष्टाचार

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